रास्ते कभी खत्म_नही होते, 
बस लोग_हिम्मत हार_जाते है ।।




मिलावट का जमाना है साहब, 
कभी हमारी_हाँ में हाँ भी मिला_दिया करो ।।




अरे यार मुझको कोई बतायेगा कि 
ये दिल पे रखने वाले_पत्थर मिलते कहा हैं ।।


सीधा साधा भोला भाला मैं ही सब से सच्चा हूँ, 
कितना भी हो जाऊं बड़ा माँ आज भी तेरा बच्चा हूँ।




किन अल्फाज़ो में कहूँ कि मुझे तुम्हारी आदत हो गई है... 
ये खूबसूरत मोहब्बत तेरी.. अब मेरी इबादत हो गई ह




वो मेरी रूह में बस गया, दो कदम साथ चलकर, 
जाने कैसे जी लेते है लोग, हमसफ़र बदल कर





बैठी है चुपचाप, बात नहीं करती, 
मेरी उदासी भी, उदास है मुझसे.





बहुत रोका लेकिन रोक ही नहीं पाया, 
मुहब्बत बढ़ती ही गयी मेरे गुनाहों की तरह





ना जाने इतनी मुहब्बत कहां से आई है उसके लिये, 
कि मेरा दिल भी उसकी खातिर मुझसे रूठ जाता है..





गलत कहते है लोग कि संगत का असर होता है 
वो बरसों मेरे साथ रही फिर भी बेवफ़ा निकली यारो.



में बुरा हू तो बुरा ही सही,कम से कम 
शराफत का दिखावा तो नही करता.




सच कहा था किसी ने तन्हा जीना सीख लो 
मोहब्बत कितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ जाती है

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