तुम्हे क्या पता किस दौर से गुजर रहा हूँ मैं…कहने को तो ज़िंदा हूँ…मगर…मौत से गुज़र रहा हूँ मैं 


मैं तेरे इतने क़रीब आना चाहता था, कि जब भी तेरी आखों से आँसू गिरे तो मेरे कंधे पे गिरे…
एक ही समझने वाला था मुझे , अब वो भी समझदार हो गया  
तुझे हर बात पर मेरी ज़रुरत पड़ती , काश ! मैं भी एक झूठ होता 
कई बार सोचता हूँ कि तुझसे सवाल करूँ…फिर ख्याल आता है कि किस हक से…
हमें किसी से शिकायत नहीं अब , बस अपने आप से रूठे है हम  

कोई ज़मीन पर लाए ख़ुदा को गवाही के लिए… मेरे नसीब में वो नहीं ये दिल मानता नहीं अब भी…
कभी-कभी दर्द इतना बड़ जाता है कि,अगर कोई गलती से भी गले लगा ले तो आंख छलक जाए 
जो नसीब में नहीं होता , वो रोने से भी नहीं मिलता  
मेरे लफ़्ज़ों में ज़िंदा रहने वाली ,मैं तेरी ख़ामोशियों से मर रहा हूँ 
कभी आकर देखना मेरे दिल में, कि कितनी फ़ुर्सत से टूटा है आशियाना मेरा..
वो ढूंढ रहे हैं आशिक हमें धोखेबाज कहकर,और एक हम हैं जो उन्हें खोने के डर से उनके फरेब को देखते हुए भी अनजान बने रहे 
खैर कुछ तो किया उसने, चलो तबाह ही सही ।। 
अब मेरा हाल चाल नहीं पूछते हो तो क्या हुआ, कल एक एक से पूछोगे की उसे हुआ क्या था..??
मोहब्बत नही थी तो एक बार समझाया तो होता.. बेचारा दिल तुम्हारी खामोशी को इश्क़ समझ बैठा….
इतने मशरूफ़ कहाँ हो गए तुम आजकल दिल तोड़ने भी नहीं आते
आज इतने सालों बाद उसने मुझसे कहा कि मैं अपनी ग़लती की माफ़ी माँगती हूँ, और मैं रोते हुए सिर्फ़ यही बोल पाया कि प्यार को ग़लती नहीं कहते …
सब हमसे शिकायत करते हैं क़ि हम पत्थर होते जा रहे हैं… कोई इन हालातों से भी तो पूछो… जो बद से बदतर होते जा रहे हैं …..
वजह कुछ और थी, कुछ और ही बताते रहे….अपने थे इसलिये, कुछ ज्यादा ही सताते रहे…
ये जो तुम्हारी याद है ना, बस एक यही मेरी जायदाद है ..
उदास रातें, तन्हाई, अंधेरा, यादो की बैचेनी, मुझे हर रोज यह सब सौंप कर सूरज डूब जाता है..
वही किस्सा वही तेरी बेरुखी और वही तुम……एक ही एहसास हम कितनी बार लिखें …..
वो कहती थी कि मैं दिल का बहुत अच्छा हूँ फिर ना जाने क्यो आज बुरा बताकर छोड़ गयी … 
जिन्दगी भी आजकल जुदा जुदा सी लगती है, साँस भी लू तो कमबख्त जख्मो को हवा लगती है 
खिलौना बन गयी हूँ उसके हाथों की , रूठता वो है टूटती मैं हूँ… 
बहुत दिनों बाद उसे देखा, दिल नहीं भरा पर आँखें भर आईं…. 
किसने कहा कि हम झूठ नहीं बोलते एक बार हमारी खैरियत पूछ कर तो देखो   
पास आने की ख्वाइशें तो बहुत थी मगर पास आकर पता चला मोहब्बत फासलों में है  
घाटे और मुनाफे का बाज़ार नहीं… इश्क़ एक इबादत है, कारोबार नहीं….

2 Comments

  1. Nice Post Sir Ji Keep writing more status

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  2. http://www.loinhearts.online/2018/04/ipl-2018-timetable-full-schedule-dates.html?m=1

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