
प्यार हाथो में लगी मेहंदी की तरह होती है …. रचती है, खिलती है, और आखिर में छूट जाती है
सीने की जगह आँखों में धड़कता है ये दिल, ये इंतज़ार भी बड़ा अजीब होता है 


एक कोशिश भी नहीं की उसने मुझे रोकने की , शायद उसे मेरे चले जाने का ही इंतज़ार था 

जब कोई किसी का साथ छोड़ता है तो उसकी आंखें ही नहीं उसका दिल भी रोता है 

हमें बेहाल देखकर उनकी हिम्मत ना हुई हमारा हाल पूछने की , और उन्हें खुशहाल देखकर हमारी हिम्मत ना हुई अपना हाल बताने की 

मेरी इच्छा उसको सिर्फ पाना नहीं , भगवान से दुआ है कि उसे कभी रुलाना नहीं 
कितना अधूरा लगता हूँ मैं बिना तेरे…..जैसे रात अमावस की बिना चाँद के 
ना तो मैं तुम्हें खोना चाहती हूँ, ना ही किसी और की होना चाहती हूँ 

किसी की याद से इतना भी उदास ना हुआ करो , लोग नसीब से मिलते हैं उदासियों से नहीं 


उसके पीछे रोने का क्या फायदा , जिसने आपकी सारी खुशियाँ ही छीन ली हो 

काश मेरे में रूह ना होकर तुम होते , जब तुम हमें छोड़ कर जाते , हम मर जाते 
बेहिसाब प्यार की , आखिरी मंज़िल बस एक खामोशी 


कुछ ज़ख्मों के कर्ज़ लफ़्हज़ों से अदा नहीं होते 

हमेशा इंसान ही गलत नहीं होता , वक़्त भी गलत हो सकता है 
हम तुम्हें किस्मत की लकीरों से भी चुरा लेते… बस तुमने एक बार मेरे होने का दावा तो किया होता….
अगर तुम्हारी बात का जवाब दे दिया , तो तुम्हारा सवाल बुरा मान जाएगा 

कहाँ ढूँढोगे तुम मुझ जैसा कोई जो तुम्हारे ज़ुल्म भी सहे और तुमसे प्यार भी करे 


मैं महफ़िल में बैठूंगा ज़रूर पर पियूँगा नहीं ,मेरा दर्द मिटा सके शराब की इतनी औकात नहीं 

ना जाने तू कहाँ है पर आज भी, तेरी यादें हमारी आँखें नम कर जाती है..
हिचकियाँ आने पर अब ये वहम छोड़ दिया है मैंने कि कोई याद कर रहा है 

है क़ैद जो लब, लफ़्हज़ों पर तेरे जो पहरा है, क्यों तू इतना चुप सा गुमसुम है, क्या ज़ख्म इतना गहरा है 
अब कुछ नहीं कहूँगा मैं
…… जब तक तुम्हें मेरी कमी महसूस ना हो 

तुम्हारे बिना ज़िन्दगी काट तो सकते हैं पर गुज़ार नहीं सकते 
प्यार और विश्वास दो ऐसे पंछी है , एक उड़ जाए तो दूसरा भी उड़ जाता है 
अच्छी भली ज़िन्दगी गुजर रही थी…. फिर एक दिन वो किसी और की हो गई 
आजकल नहीं चलता प्यार जन्म जन्मों का …लोग अपना मतलब निकाल कर मुँह फेर लेते है 

कुछ ख़ताएँ बख़्शी नहीं जाती , दिल सोच समझ कर तोड़ा कीजिए 

मैं ठीक हूँ , तुम मेरे दर्द की फ़िक्र मत करना… मेरे ज़ख़्म भी भर जाएँगे तुम दुनिया से इसका ज़िकर मत करना…



अगर रो पडूँ तेरे सामने मैं किसी दिन तो समझ लेना बर्दाश्त करने की हद्द थी मेरी 


कुछ ख्वाब देखे, फिर ख्वाईशें बनी, अब यादें हैं 

नहीं मिलती पनाह कहीं भी…… जब मोहब्बत बेपनाह हो जाए
रिश्तों की तस्वीरों को जो साफ किया तो जाना कुछ चेहरों के रंग उड़ चुके हैं 


काश ! तुम ये समझ पाते… आसान नहीं होता यूँ वापिस लौट आना 

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